कंप्यूटर की सीमाएं (Limitations of Computers) – Ramesh Siyag
Computer ने भले ही हम इंसान की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है, कंप्युटर के उपयोग से हम बहुत ही जल्दी घंटों का काम मिनटों में कर सकते हैं, आज कल जीतने भी आविष्कार हुए हैं उनमें से कंप्युटर का आविष्कार सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
कंप्युटर की क्षमताएं ही आज कल इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण है, कंप्युटर की बहुत सारी विशेषताएं के साथ साथ सीमाएं भी है और आज हम कंप्युटर की सीमाएं के बारे में जानेंगे।
कंप्यूटर की सीमाएं (Limitations of Computers) –
बुद्धिमत्ता की कमी-
कंप्युटर एक मशीन है, इसका कार्य प्रोग्रामों के निर्देशों का पालन करना है कंप्युटर किसी भी स्थिति में ना तो निर्देश से अधिक ना ही इससे कम कार्य कर सकता है।
कंप्युटर को जितना भी कार्य दिया जाता है कंप्युटर सिर्फ उतना ही कार्य करता है, कंप्युटर वैज्ञानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में निरंतर शोध कर रहे हैं ताकि कंप्युटर के अंदर बुद्धिमत्ता की कमी को कुछ हद तक दूर कर सके।
सामान्य बोध की कमी –
कंप्युटर में स्वयं की तार्किक क्षमता नहीं होती है तथा स्वयं दिए गए तथ्यों में से सही या गलत का चुनाव नाही कर सकता है, तथा कंप्युटर पूरी तरह से दिए गए निर्देशों पर निर्भर होता है यदि कंप्युटर में त्रुटिपूर्ण इनपुट देने पर Output भी त्रुटिपूर्ण होगा।
सॉफ्टवेयर की सीमाओं में बंधा हुआ –
कंप्यूटर का कार्य अपने सॉफ्टवेयर की सीमाओं से बना हुआ होता है तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में उपलब्ध क्षमताओं के अनुसार ही कार्य करता है, अन्य कार्य करवाने के लिए कंप्यूटर को उचित सॉफ्टवेयर (प्रोग्राम) देना होता है, जिसके कारण उस विशेष सॉफ्टवेयर का क्रय विक्रय करना होता है और एक सॉफ्टवेयर की लागत कंप्यूटर के मूल्य से अधिक होती है।
डाटा संरक्षण में सावधानी –
कंप्यूटर में किसी भी डाटा को बहुत ही सावधानी से सुरक्षित रखना होता है यदि हम कुछ गलती करते हैं तो हमारा डाटा हमेशा के लिए नष्ट हो सकता है।
विद्युत पर निर्भर –
कंप्यूटर को कार्य करने के लिए विद्युत अति आवश्यक होती है, बिना बिजली के हमारा कंप्यूटर कोई काम का नहीं है हम चाह कर भी उससे कोई कार्य नहीं करा सकते हैं।